Gam Bhari और Dard Bhari Shayari: आप प्रेमी हो या प्रेमिका यह शायरी दोनों को अच्छी लगेगी। अब Love में दिल टूट जाना कोई खास बात नहीं हैं रोज न जाने कितने दिल टूटते होंगे। कई प्रेमियों और प्रेमिकाएं अपना अपना दिल का हाल बताना चाहते होंगे but woh share नहीं कर पाते तोह अब इस लेख में जो शायरी हैं वो पढ़के आप अपने दिल की परिस्थिति अपने Social Handle पर शेयर कर सकते हैं।
इस Article में Gam Bhari और Dard Bhari Shayari पढ़ने और साथ में image भी देखने को मिलेगी।
Table Of Content
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1. Gam Bhari Shayari In Hindi
1. मैंने जिस दिल को तेरे नाम की मूरत बना रखा था,
उसी दिल को तूने पत्थर समझकर तोड़ दिया।
2. तेरे जाने के बाद ऐसा सन्नाटा उतर आया,
जैसे मेरी आत्मा ने भी मुझसे रिश्ता तोड़ लिया।
3. हम रोए भी तो इस डर से कि आवाज़ न निकल जाए,
कहीं मेरा टूटना भी लोगों के लिए तमाशा न बन जाए।
4. तेरी यादें अब भी मेरे भीतर साँस लेती हैं,
और मेरा हर एक पल उसी आग में जलता रहता है।
5. जिसे पाने की ख्वाहिश में खुद को खो दिया था,
वही शख्स मुझे अधूरा छोड़कर पूरा संसार बन गया।
6. मैंने तेरी ख़ातिर हर दर्द को मुस्कान में छिपाया,
और तूने मेरे सच्चे दिल को ही बेवफ़ाई से रुलाया।
7. अब दिल को किसी से लगाना नहीं चाहता,
बहुत देख लिया, मोहब्बत में सिर्फ़ टूटना ही आता है।
8. तेरे बिना जीना तो सीख लिया मैंने,
पर जीते-जी मर जाने का दर्द अब भी बाकी है।
9. मेरी खामोशी को मेरी मजबूरी मत समझना,
इस खामोशी के भीतर एक टूटा हुआ समंदर बसा है।
10. जिस दिन तू गया, उसी दिन कुछ मेरे भीतर मर गया,
बाहर तो मैं रहा, पर अंदर का सब कुछ बिखर गया।
11. तेरी यादों ने मुझे हर रात का कैदी बना रखा है,
नींद आती भी है तो बस तुझसे मिलने की सज़ा लेकर।
12. हमने तो अपना सब कुछ तुझ पर लुटा दिया,
और तूने हमें ही सबसे बड़ा अजनबी बना दिया।
13. आज भी तेरे नाम का ज़ख्म ताज़ा है मेरे भीतर,
जैसे कोई पुरानी आग अब भी राख में जली जा रही हो।
14. जिस पर भरोसा किया, उसी ने तोड़ डाला,
जिसे अपना समझा, उसी ने बेगाना कर डाला।
15. मोहब्बत ने मुझे बस इतना समझाया है,
सच्चा दिल अक्सर सबसे गहरी चोट खाता है।
2. Dard Bhari Shayari in Hindi
कैसी लगी Gam Bhari और Dard Bhari Shayari। आपकी औरसे आपके मन में और कोई शायरी आए तो नीचे कमेंट बॉक्स में Put कर देना अगर हमें अच्छी लगी तो इस लेख में वो Includ कर देंगे।
ThankYou By H.K.


